गाइड आयुर्वेदिक पर्चे का सही फ़ॉर्मेट
आयुर्वेदिक पर्चे का सही फ़ॉर्मेट
अपडेट: 25 अक्टूबर 2026 · Appsites Infotech, जयपुर
पर्चा मरीज़ के हाथ में आपका इलाज है। घर पहुँचकर उसे वही याद रहता है जो पर्चे में साफ़ लिखा हो। अच्छा पर्चा मरीज़ की ग़लती कम करता है, फ़ॉलो-अप आसान बनाता है और आपके रिकॉर्ड का भी काम करता है।
पर्चे के 8 हिस्से
- ऊपर का हिस्सा: डॉक्टर का नाम, योग्यता (BAMS / MD आयुर्वेद), पंजीकरण संख्या, क्लिनिक का पता, फ़ोन और समय।
- मरीज़: नाम, उम्र, लिंग, रजिस्ट्रेशन नंबर और तारीख़; ज़रूरत हो तो वज़न और BP।
- शिकायत और जाँच: मुख्य शिकायत और कब से; ज़रूरी हो तो नाड़ी, जिह्वा जैसे अष्टविध परीक्षा के मुख्य बिंदु।
- निदान: आयुर्वेदिक निदान; पता हो तो आधुनिक नाम भी।
- दवाएँ: हर दवा की पूरी लाइन (नीचे देखें)।
- पथ्य-अपथ्य और सलाह: क्या खाएँ, क्या न खाएँ, दिनचर्या, योग या पंचकर्म की सलाह।
- जाँचें: जो जाँचें करवानी हैं।
- अगली विज़िट और हस्ताक्षर: अगली तारीख़, डॉक्टर के हस्ताक्षर और मुहर।
दवा की हर लाइन में क्या हो
| दवा का रूप | नाम | मात्रा | समय | भोजन से | अनुपान | दिन |
|---|---|---|---|---|---|---|
| वटी, चूर्ण, क्वाथ, आसव-अरिष्ट, घृत, तैल… | पूरा शास्त्रीय नाम | गोली / ग्राम / ml | 1-0-1 और शब्दों में "सुबह-शाम" | पहले / बाद में | गुनगुना पानी, शहद, घी, दूध… | कितने दिन |
"1-0-1" का मतलब सुबह 1, दोपहर 0, रात 1। कई मरीज़ यह नहीं समझते, इसलिए साथ में शब्दों में भी लिखें।
नमूना पर्चा
नीचे सिर्फ़ फ़ॉर्मेट दिखाया गया है – दवा के नाम और मात्रा की जगह ख़ाली है, जिसे डॉक्टर मरीज़ के हिसाब से भरते हैं।
डॉ. ______, BAMS (पंजीकरण सं. ______)
______ आयुर्वेद क्लिनिक, ______ · फ़ोन ______ · समय: सुबह 10–1, शाम 5–8
मरीज़: ______ · उम्र / लिंग: ______ · Reg. No.: ______ · तारीख़: __-__-____
मुख्य शिकायत: ______ (कब से: ______)
जाँच: नाड़ी ______ · जिह्वा ______ · BP ______
निदान: ______
Rx
1. ______ वटी — ___ गोली — सुबह-शाम (1-0-1) — भोजन के बाद — गुनगुने पानी से — ___ दिन
2. ______ चूर्ण — ___ ग्राम — रात को (0-0-1) — भोजन के बाद — गुनगुने पानी से — ___ दिन
3. ______ अरिष्ट — ___ ml, बराबर पानी मिलाकर — दोपहर-रात (0-1-1) — भोजन के बाद — ___ दिन
पथ्य: ______ · अपथ्य: ______
सलाह: ______ · जाँचें: ______
अगली विज़िट: __-__-____ हस्ताक्षर / मुहर
पर्चे को साफ़ और सुरक्षित बनाने के नियम
- छपा हुआ या बहुत साफ़ लिखा पर्चा दें; दवा का नाम छोटा करके (जैसे दो अक्षर) न लिखें।
- हर दवा के साथ मात्रा की इकाई (गोली, ग्राम, ml) और कुल दिन ज़रूर लिखें।
- अनुपान और भोजन से पहले-बाद की बात मरीज़ की भाषा में समझाएँ।
- जिन दवाओं पर "चिकित्सक की देखरेख में लें" लिखा होता है (Schedule E(1)), उनकी मात्रा और अवधि ख़ास ध्यान से लिखें।
- एलर्जी, गर्भावस्था, बच्चों और बुज़ुर्गों में मात्रा का विशेष ध्यान रखें और पर्चे पर नोट करें।
- हर पर्चे की एक कॉपी अपने रिकॉर्ड में रखें; तारीख़ और हस्ताक्षर के बिना पर्चा न दें।
डिजिटल पर्चा और WhatsApp
- पर्चा क्लिनिक के अपने नंबर से, सीधे मरीज़ या उसके परिवार के नंबर पर भेजें – किसी ग्रुप में नहीं।
- मरीज़ से पूछ लें कि वह WhatsApp पर पर्चा चाहता है या नहीं।
- PDF या साफ़ फ़ोटो भेजें, ताकि दवा की दुकान पर भी पढ़ा जा सके।
पर्चा-सेट से समय बचाएँ
अम्लपित्त, संधिवात जैसे आम रोगों में आपका पर्चा अक्सर मिलता-जुलता होता है। उसे एक बार "सेट" की तरह सहेज लें और अगले मरीज़ के लिए वहीं से शुरू करें – फिर मरीज़ की प्रकृति, उम्र और अवस्था के हिसाब से बदलें। सेट समय बचाता है, पर हर मरीज़ के लिए सोच-समझकर बदलना आयुर्वेद का मूल है।
और गाइड
यह गाइड सामान्य जानकारी के लिए है। नियम राज्य के अनुसार बदलते हैं – अपने राज्य बोर्ड, स्थानीय विभाग या CA से पुष्टि करें।