गाइड क्लिनिक की फ़ार्मेसी और GST
क्लिनिक की फ़ार्मेसी और GST
अपडेट: 25 अक्टूबर 2026 · Appsites Infotech, जयपुर
ध्यान दें: यह सामान्य जानकारी है, कर-सलाह (tax advice) नहीं। GST की दरें और नियम बदलते रहते हैं – यह पेज 25 अक्टूबर 2026 तक की जानकारी पर है। अपना फ़ैसला अपने CA से पूछकर लें।
परामर्श और इलाज पर GST नहीं
किसी क्लिनिक या पंजीकृत चिकित्सक की स्वास्थ्य सेवाएँ (health care services) GST से छूट (exempt) में हैं। मान्य चिकित्सा पद्धति की परिषद में पंजीकृत आयुर्वेद चिकित्सक भी इसमें आते हैं। इसलिए परामर्श की फ़ीस और रोग के इलाज के लिए की गई पंचकर्म थेरेपी पर GST नहीं लगता।
पर बीमारी के इलाज के बजाय सिर्फ़ आराम या सुंदरता के लिए दी गई सेवाएँ (जैसे स्पा या कॉस्मेटिक मसाज) "स्वास्थ्य सेवा" में नहीं गिनी जातीं – उन पर GST लग सकता है।
दवा बेचने पर GST
- काउंटर से अलग से बेची गई दवा "सामान की बिक्री" है, सेवा नहीं – इस पर GST लगता है।
- आयुर्वेदिक दवाएँ (HSN 3003 / 3004) 22 सितंबर 2025 से आम तौर पर 5% GST में हैं (पहले ज़्यादातर 12% में थीं)। MRP में GST शामिल रहता है। कच्ची जड़ी-बूटियों और कुछ ख़ास उत्पादों की दर अलग हो सकती है।
- हर दवा का HSN और दर अपने सप्लायर के बिल से मिलाएँ।
- भर्ती मरीज़ के पैकेज में शामिल और अलग से न बेची गई दवा आम तौर पर इलाज की सेवा का हिस्सा मानी जाती है – अपने मामले में CA से पक्का कर लें।
GST पंजीकरण कब ज़रूरी है
- सिर्फ़ परामर्श और इलाज: सारी कमाई छूट वाली है, तो पंजीकरण की ज़रूरत नहीं।
- दवा भी बेचते हैं: पंजीकरण की सीमा "कुल कारोबार" (aggregate turnover) पर देखी जाती है, और इसमें छूट वाली परामर्श की कमाई भी जुड़ती है।
- जो सिर्फ़ सामान बेचते हैं, उनके लिए ज़्यादातर राज्यों में सीमा ₹40 लाख है। पर क्लिनिक सेवा भी देता है, इसलिए आम तौर पर ₹20 लाख की सीमा लगती है (पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों में इससे कम)।
- उदाहरण: साल में परामर्श ₹15 लाख + दवा की बिक्री ₹7 लाख = ₹22 लाख – ऐसे में पंजीकरण ज़रूरी हो सकता है।
- दवा ऑनलाइन (marketplace से) या दूसरे राज्य में बेचते हैं, तो सीमा से कम कारोबार पर भी पंजीकरण ज़रूरी हो सकता है।
पंजीकरण के बाद बिल कैसा हो
- परामर्श और इलाज का बिल अलग (उस पर GST नहीं), दवा का टैक्स इनवॉइस अलग।
- टैक्स इनवॉइस में: आपका GSTIN, बिल नंबर और तारीख़, मरीज़ / ख़रीदार का नाम, हर दवा का HSN, मात्रा, बैच, एक्सपायरी, दर और GST। एक ही राज्य में बिक्री पर GST आधा CGST और आधा SGST में दिखता है।
- छोटे कारोबार के लिए Composition Scheme होती है – इसमें ग्राहक से GST नहीं लिया जाता और "बिल ऑफ़ सप्लाई" दिया जाता है। पर जिनकी सेवा (परामर्श) की कमाई ज़्यादा हो, उन्हें यह अक्सर नहीं मिलती – CA से पूछें।
ख़रीद का रिकॉर्ड
- हर ख़रीद का GST बिल, बैच, एक्सपायरी, MRP और ख़रीद की दर सँभालकर रखें।
- नियमित (regular) पंजीकरण में बेची गई दवा पर चुकाए GST का क्रेडिट (ITC) मिल सकता है। पर जो सामान इलाज (छूट वाली सेवा) में लगता है, उस पर ITC नहीं मिलता – इसका हिसाब CA के साथ रखें।
हर महीने की आदतें
- बिक्री और ख़रीद के बिल मिलाना
- एक्सपायरी के क़रीब की दवाएँ देखना
- GST रिटर्न (जैसे GSTR-1, GSTR-3B) समय पर भरना
- इलाज की कमाई और दवा की बिक्री अलग-अलग दिखाना
दवा बेचने के कुछ और नियम
- जिन आयुर्वेदिक दवाओं में Schedule E(1) के द्रव्य हों, उन पर "चिकित्सक की देखरेख में लें" की चेतावनी होती है – ऐसी दवा मरीज़ को समझाकर ही दें।
- अलग से दवा की दुकान चलानी हो, तो अपने राज्य के आयुष / ड्रग लाइसेंसिंग अधिकारी से लाइसेंस के नियम पहले पूछ लें।
और गाइड
यह गाइड सामान्य जानकारी के लिए है। नियम राज्य के अनुसार बदलते हैं – अपने राज्य बोर्ड, स्थानीय विभाग या CA से पुष्टि करें।